शायरी
आगोस में हम जमी के एक दिन हो जाएँगे,
या हो दरिया, या समंदर देखते रह जाएँगे,
चमकता है भले ही आज सितारा मेरा बुलंदी में,सब यहाँ चोचले हैं सब यहीं रह जाएँगे|
उम्र बढ़ने से चेहरे में निखार आ जाता है,
जैसे छुट्टी से पहले कोई त्योहार आ जाता है,
जब भी मैंने सरीफ बनने की कोशिश की ,
पता नही कहाँ से उड़कर ये रेशमी रुमाल आ जाता है.....
टूटे हुये दरख्त को ताज बना रखा है,
छोटे से ग़ुलाब को मुमताज़ बना रखा है,
मोहब्बतें तो रोज़ नीलाम होती है आइयासी की दुकानो में,
फिर क्यूँ इश्क़ का बाज़ार रखा है...
ख़ामोश क्यूँ है तू ज़रा सा बोल दे,
अंदर जितना ज़हर है ज़ुबा से तोल दे,
मुझे मालूम है छुपाकर रखता है तु तमाम राज मुझसे,
मुझे क़सम है तेरी ख़ामोशी की अब अपने दिल का ताला मेरे लिए दे

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